रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) के अनुसार, तुर्की क्षेत्र के संघर्षों से भाग रहे पत्रकारों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना बन गया है, वहीं यह स्वतंत्र रिपोर्टिंग के खिलाफ राष्ट्रपति रेसेप तय्यिप एर्दोगान की सरकार की कार्रवाई के कारण मीडिया निर्वासन का भी स्रोत है। अफगानिस्तान, फिलिस्तीन या सीरिया से कम से कम 46 पत्रकारों ने हाल ही में तुर्की में शरण ली है। हालांकि, आरएसएफ ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि तुर्की सरकार अपने ही देश के पत्रकारों पर दबाव बना रही है, जिसके परिणामस्वरूप कई को निर्वासन का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति तुर्की में मीडिया स्वतंत्रता के लिए एक विरोधाभासी परिदृश्य प्रस्तुत करती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एर्दोगान प्रशासन स्वतंत्र पत्रकारिता को दबाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इस कारण, तुर्की में काम करने वाले स्थानीय पत्रकारों को उत्पीड़न, गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर बना रहता है। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बनी हुई है।
