विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच संभावित वार्ता से चीन को खास नुकसान नहीं होगा, बल्कि उसे लाभ हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पहले ही दक्षिण कोरिया के साथ वार्षिक ‘उल्ची फ्रीडम शील्ड’ अभ्यास के पैमाने को काफी कम करने का आदेश दे दिया है। उन्होंने अभ्यास की लागत और प्योंगयांग को ‘बिल्कुल अनुचित और शत्रुतापूर्ण’ संकेत भेजने के लिए इसकी आलोचना की है। ट्रम्प का उत्तर कोरियाई नेता के साथ “बहुत अच्छा संबंध” होने का दावा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे अमेरिका अपनी सुरक्षा प्रतिबद्धताओं को कमज़ोर कर सकता है, जिससे चीन को रणनीतिक लाभ मिल सकता है। यह कदम कोरियाई प्रायद्वीप में शक्ति संतुलन को बदल सकता है और चीन की स्थिति को मजबूत कर सकता है। इस स्थिति में चीन, अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ के रूप में उभर सकता है।

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