अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते से एकतरफा हटकर इस पर अपनी असफलता को और बढ़ा दिया है। इस फैसले के बाद ईरान पर लगे प्रतिबंधों में वृद्धि हुई, जिससे तेहरान को आर्थिक नुकसान हुआ, लेकिन साथ ही उसकी शासन व्यवस्था को मजबूत होने का अवसर मिला। यूरोपीय देशों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन की इस नीति से मध्य पूर्व में स्थिति और जटिल हो गई है। अब यूरोप इस समझौते को बचाने के लिए नए सिरे से प्रयास कर रहा है, लेकिन सफलता की संभावना कम नज़र आ रही है। इस स्थिति से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं और क्षेत्रीय अस्थिरता का खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप की इस नीति ने ईरान को और अधिक कट्टरपंथी बना दिया है।