बच्चों के थेरेपिस्ट ऐनी हार्टमैन के पास उन माता-पिता की संख्या बढ़ रही है जिनके बच्चे जिद्दी और भावनात्मक रूप से प्रतिक्रियाहीन हैं। हार्टमैन बताती हैं कि एक दस वर्षीय बालक ने थेरेपी के दौरान अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए पूछा था कि क्या वह ‘पागल’ है, जिसके बाद उसे राहत मिली। बच्चे अक्सर बाहरी तौर पर सामान्य व्यवहार करते हैं, लेकिन आंतरिक रूप से भावनात्मक रूप से अलग-थलग महसूस करते हैं। माता-पिता अक्सर निराशा और असहाय महसूस करते हैं क्योंकि बच्चे किसी भी चीज़ में रुचि नहीं दिखाते या भावनात्मक रूप से प्रतिक्रिया नहीं देते। हार्टमैन का कहना है कि माता-पिता कभी-कभी हताश हो जाते हैं और मदद की तलाश में आते हैं। यह स्थिति बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ते दबाव और भावनात्मक चुनौतियों का संकेत है। थेरेपी का उद्देश्य बच्चों को अपनी भावनाओं को समझने और व्यक्त करने में मदद करना है।