आगामी विश्व कप में, विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रुप चरण में दूसरा स्थान प्राप्त करने वाली टीम की तुलना में तीसरे स्थान पर रहने वाली टीम को नॉकआउट चरण में अपेक्षाकृत आसान मुकाबला मिल सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि संभावित ड्रॉ के अनुसार, तीसरे स्थान पर रहने वाली टीम को मजबूत विरोधियों से कम टकराने की संभावना है। यह स्थिति 2010 के विश्व कप में स्पेन और पुर्तगाल के बीच हुए विवादास्पद मैच की याद दिलाती है, जहाँ दोनों टीमों ने जानबूझकर एक विशेष ड्रॉ से बचने के लिए परिणाम को प्रभावित करने का प्रयास किया था। इस परिदृश्य को देखते हुए, कुछ टीमों के लिए ग्रुप में तीसरा स्थान प्राप्त करना भी एक रणनीतिक लाभ हो सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि यह विश्व कप के नॉकआउट चरण में अप्रत्याशित परिणामों को जन्म दे सकता है। इस 'गिजॉन शर्म' की पुनरावृत्ति की आशंका से टूर्नामेंट में रोमांच और बढ़ सकता है। टीमों के बीच प्रतिस्पर्धा अब न केवल जीत के लिए, बल्कि अनुकूल ड्रॉ के लिए भी होगी।