ताइवान, अमेरिका के सहयोगी के रूप में, अमेरिका की विश्वसनीयता को लेकर चिंतित है। यह चिंता डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के दौरान विश्वास में कमी के कारण बढ़ी है। अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े अप्रत्यक्ष युद्ध के कारण, अमेरिका के हथियारों का भंडार काफी कम हो गया है। इस वजह से, अमेरिका अपने सहयोगी को हथियारों की आपूर्ति में देरी करने पर विचार कर रहा है। ताइवान के लिए यह स्थिति गंभीर है क्योंकि यह अमेरिका पर अपनी सुरक्षा के लिए निर्भर है। हथियारों की आपूर्ति में देरी ताइवान की सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है। यह घटनाक्रम अमेरिका के वैश्विक नेतृत्व और उसकी विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है।