सावरमैन ऐतिहासिक रूप से ख़रीदे गए वोटों की कहानियाँ बता रहे हैं। उनका कहना है कि पहले बैरन अपने अधीन काम करने वालों को मतदान केंद्र तक ले जाते थे। यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि एक पुरानी प्रथा है। हालाँकि, एक सवाल उठता है कि क्यों ‘Dagens Nyheter’ (DN) के स्टॉल पर लंबे समय तक रिश्वत के तौर पर वोडका की बोतल रखी हुई थी। यह घटना मीडिया में नैतिकता और भ्रष्टाचार की संभावनाओं पर सवाल उठाती है। सावरमैन के खुलासे राजनीतिक व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करते हैं। यह मुद्दा ‘Dagens Nyheter’ (DN) के भीतर की संभावित अनियमितताओं पर भी ध्यान केंद्रित करता है।