स्वीडन की संसद ने हाल ही में एक विवादास्पद कानून पारित किया है जिससे आप्रवासियों के अधिकारों पर असर पड़ेगा। इस नए कानून के तहत, सरकार अब “अच्छे व्यवहार” के अस्पष्ट आधार पर किसी भी व्यक्ति की निवास परमिट रद्द कर सकती है। इसके अतिरिक्त, सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ कर्मचारियों को अब उन लोगों की रिपोर्ट करने के लिए बाध्य किया जाएगा जिन पर अवैध रूप से देश में रहने का संदेह है। विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने इस कानून की कड़ी आलोचना की है, उनका तर्क है कि यह कानून भेदभावपूर्ण है और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है। आलोचकों का कहना है कि “अच्छा व्यवहार” की परिभाषा अस्पष्ट होने के कारण इसका दुरुपयोग हो सकता है। यह कानून स्वीडन में आप्रवासन नीतियों में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है। इस कदम से देश में रहने वाले आप्रवासियों के बीच असुरक्षा और भय का माहौल बन सकता है।