हाल ही में आईएसडब्ल्यूएपी (ISWAP) के कमांडरों के आत्मसमर्पण के बाद सुरक्षा एजेंसियों में चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि हथियार छोड़ने के बावजूद, ये कमांडर अपनी चरमपंथी विचारधारा को नहीं छोड़ते हैं। आत्मसमर्पण करने वाले इन कमांडरों के कारण भविष्य में नए खतरे उत्पन्न हो सकते हैं, क्योंकि वे फिर से संगठित होकर हिंसा फैला सकते हैं। यह सवाल उठ रहा है कि क्या किसी उग्रवादी के हथियार छोड़ने का मतलब खतरे का अंत है, या यह सिर्फ एक नया रूप ले लेता है। सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वालों की गहन निगरानी और पुनर्वास कार्यक्रम आवश्यक हैं। इस स्थिति में, विचारधारा के प्रसार को रोकने के लिए दीर्घकालिक रणनीति की आवश्यकता है। नाइजीरिया में यह मुद्दा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां आईएसडब्ल्यूएपी सक्रिय है।