हाल ही में एक अध्ययन में यह पाया गया है कि खेल से जुड़े शराब विज्ञापनों के माध्यम से किशोरों को शराब पीने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि किशोरावस्था शारीरिक और मानसिक रूप से संवेदनशील अवस्था होती है, और इस दौरान शराब के विज्ञापनों के संपर्क में आने से युवाओं में शराब पीने की आदत विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है। यह विज्ञापन युवाओं को यह संदेश देते हैं कि शराब पीना सामान्य और स्वीकार्य है, जिससे वे आसानी से इसकी ओर आकर्षित हो सकते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि शराब कंपनियों द्वारा इस आयु वर्ग को लक्षित करना अनैतिक है, क्योंकि वे जानते हैं कि किशोर अधिक आसानी से प्रभावित होते हैं। इस तरह के विज्ञापन पर रोक लगाने और युवाओं को शराब के हानिकारक प्रभावों से बचाने की आवश्यकता है। सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की है और सरकार से सख्त नियम बनाने का आग्रह किया है।