प्रसिद्ध लेखक मैक्सिमो हुएर्ता ने अपने बचपन के डर के बारे में खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि वह घर में डर के माहौल में पले-बढ़े थे और अक्सर अपनी कल्पनाओं में खो जाते थे ताकि वे शोर न सुन सकें। हुएर्ता ने अपने बचपन की यादों को एक उपन्यास "मामा एस्टा डोरमिडा" (Mama está dormida) में उतारा है, जो एक माँ और बेटे के रिश्ते पर आधारित है। यह उपन्यास एक ऐसी माँ की कहानी कहता है जो अपनी याददाश्त खो चुकी है और एक ऐसे बेटे की जो उसकी देखभाल करता है। यह पुस्तक जनवरी महीने में प्रकाशित हुई है और पाठकों को भावनात्मक रूप से जोड़ रही है। लेखक का मानना है कि हर बचपन खुशहाल नहीं होता और उन्होंने अपने अनुभव को साझा करके दूसरों को प्रेरित करना चाहा है। यह कहानी व्यक्तिगत संघर्ष और परिवार के रिश्तों की जटिलताओं को दर्शाती है।

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