दक्षिण तेल अवीव के शापिरा पड़ोस में निवासी एक अभिनव पहल के माध्यम से जैविक कचरे का उपयोग कर रहे हैं। यहाँ लोग अपने जैविक कचरे के बदले एक विशेष 'मुद्रा' प्राप्त करते हैं। इस प्रणाली से प्राप्त धन का उपयोग एक समृद्ध सामुदायिक उद्यान और किसानों के बाजार को वित्तपोषित करने के लिए किया जा रहा है। यह पहल कचरा प्रबंधन को आर्थिक लाभ और सामुदायिक विकास से जोड़ती है। इस इको-फ्रेंडली मिनी-इकोनॉमी के सकारात्मक परिणाम अब अन्य क्षेत्रों में भी फैल रहे हैं। यह मॉडल शहरी क्षेत्रों में स्थिरता और सामुदायिक सहयोग को बढ़ावा देने का एक प्रभावी तरीका है। इस परियोजना ने स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक आत्मनिर्भरता का एक नया उदाहरण पेश किया है।