दक्षिण अफ्रीका में प्रवासियों, विशेषकर अफ्रीकियों के खिलाफ नफ़रत फैलाने और हिंसा भड़काने की कोशिशों के खिलाफ मानवाधिकार संगठनों, राजनेताओं और राष्ट्रपति कार्यालय ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इन समूहों ने ज़ेनोफ़ोबिया (विदेशी भय) को बढ़ावा देने वाले बयानों की निंदा की है और गलत सूचना के प्रसार को लेकर चेतावनी जारी की है। राष्ट्रपति कार्यालय ने विशेष रूप से सतर्कता बरतने और स्वयं कानून हाथ में लेने के प्रयासों को रोकने का आह्वान किया है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि प्रवासियों को 'अवैध' बताना पूरी तरह से गलत है और यह हिंसा को बढ़ावा देता है। सरकार ने इस तरह की नफ़रत फैलाने वाली बातों को रोकने के लिए कार्रवाई करने का वादा किया है। यह घटनाक्रम दक्षिण अफ्रीका में प्रवासियों के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर चल रही बहस को और तेज कर सकता है। अधिकारियों ने सभी नागरिकों से शांति बनाए रखने और कानून का पालन करने का आग्रह किया है।