पिछले वर्ष हुए एक बड़े प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर ध्वनि हथियारों के इस्तेमाल का मुद्दा फिर से चर्चा में है। सैकड़ों नागरिकों ने इस हथियार के उपयोग की शिकायत की थी, जिसके बाद यह मामला सार्वजनिक ध्यान में आया था। अब, आरोप लगाए जा रहे हैं कि सत्ताधारी दल के चुनावी अभियान के हिस्से के रूप में इस मुद्दे को फिर से उठाया जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि यह पीड़ितों पर दबाव बनाने का एक नया तरीका हो सकता है। सरकार ने अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस मामले ने नागरिकों के अधिकारों और राजनीतिक उद्देश्यों के लिए प्रौद्योगिकी के दुरुपयोग को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। जांचकर्ताओं का कहना है कि इस मामले में और अधिक जानकारी की आवश्यकता है।
