विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया के लगातार उपयोग से यह सामान्य और हानिरहित लगने लगता है, जो चिंताजनक है। इस निरंतर संपर्क के कारण इसके नकारात्मक प्रभावों को कम आंका जा सकता है। शोध के आधार पर सोशल मीडिया के उपयोग पर सीमाएं लगाने की मांग की जा रही है ताकि इसके संभावित हानिकारक प्रभावों से बचा जा सके। यह सीमाएं युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को सुरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं। विशेषज्ञों का तर्क है कि सोशल मीडिया के उपयोग को विनियमित करने से इसके नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है। इस विषय पर आगे शोध और नीति निर्माण की आवश्यकता है। सोशल मीडिया के उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी आवश्यक है।