स्मर पार्टी, जिसने कभी रक्षा सहयोग समझौते (DCA) को ‘विश्वासघाती’ बताया था और जनमत संग्रह का वादा किया था, अब सरकार में होने के बावजूद समझौते में कोई बदलाव नहीं लाई है। वर्षों तक इस समझौते की तीखी आलोचना करने के बाद, पार्टी ने अब इसे यथावत रखने का निर्णय लिया है। यह निर्णय पार्टी की पूर्व की स्थिति से एक महत्वपूर्ण बदलाव दर्शाता है। आलोचकों का कहना है कि यह पार्टी की राजनीतिक रणनीति में एक बदलाव है, जबकि समर्थकों का दावा है कि यह राष्ट्रीय हित में लिया गया एक व्यावहारिक कदम है। इस फैसले से आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस छिड़ने की संभावना है। पार्टी ने अभी तक इस बदलाव के पीछे के कारणों का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि भविष्य में पार्टी इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है।

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