शाह सरकार द्वारा प्रशासनिक सुधारों को तेज़ी से लागू करने के कारण नौकरशाही में भय और अनिश्चितता का माहौल बन गया है। सरकारी कर्मचारियों का कहना है कि राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ रहा है, जिससे काम करने में कठिनाई हो रही है। इन सुधारों से नौकरशाही में विश्वास की कमी महसूस की जा रही है, और कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। कई अधिकारियों ने गुमनाम रूप से अपनी चिंता व्यक्त की है, यह बताते हुए कि वे अपने करियर और भविष्य को लेकर चिंतित हैं। सरकार का दावा है कि ये सुधार दक्षता बढ़ाने और पारदर्शिता लाने के लिए आवश्यक हैं, लेकिन नौकरशाहों को डर है कि इससे उनकी स्वायत्तता कम हो जाएगी। स्थिति को नियंत्रित करने और विश्वास बहाल करने के लिए सरकार और नौकरशाही के बीच संवाद की आवश्यकता है। सुधारों को लागू करने के तरीके पर पुनर्विचार करना भी ज़रूरी हो सकता है।

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