राजनीतिक विश्लेषक जोवानका माटिक का कहना है कि नियामक परिषद (REM) के गठन को लेकर मौजूदा घटनाक्रम 20 साल पहले की प्रक्रियाओं की पुनरावृत्ति है। उन्होंने इस प्रक्रिया को शुरू से ही मृत घोषित कर दिया है। माटिक के अनुसार, वर्तमान स्थिति और पिछली गलतियों के समान है, जिसका संकेत यह है कि पिछली समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है। यह घटनाक्रम मीडिया नियामक संस्था की स्वतंत्रता और कार्यक्षमता के बारे में गंभीर प्रश्न खड़े करता है। उनका मानना है कि बार-बार एक ही तरह की चुनौतियों का सामना करना यह दर्शाता है कि संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है। माटिक ने इस बात पर जोर दिया कि बिना किसी सार्थक बदलाव के, भविष्य में भी यही स्थिति दोहराती रहेगी और मीडिया क्षेत्र में सुधार की उम्मीद कम हो जाएगी। यह टिप्पणी एक लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे पर प्रकाश डालती है।

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