एक प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि 100 अरब रुपये की एसयूवी की खरीद में किसी भी सांसद की कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने बताया कि समितियों के कार्यों और विधायी कार्यों के लिए आधिकारिक वाहनों का निर्धारण और प्रावधान नौकरशाही द्वारा किया जाता है। किसी भी वाहन को किसी भी सांसद के नाम पर पंजीकृत नहीं किया गया है। प्रवक्ता के अनुसार, यह खरीद पूरी तरह से प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा थी। सांसदों ने इस खरीद प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं किया और न ही उनकी कोई व्यक्तिगत भूमिका थी। यह जानकारी उन आरोपों के जवाब में दी गई है जो हाल ही में सामने आए थे। प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती गई थी।
