ताइपेई में रूसी अधिकारियों द्वारा द्वितीय विश्व युद्ध पर आधारित 81 वर्षीय सोवियत दस्तावेज़ी ‘पराजय सैन्यवादी जापान’ (Porážka militaristického Japonska) का निजी प्रदर्शन करने से ताइवान में नाराजगी फैल गई है। ताइवान सरकार का मानना है कि यह कदम मास्को द्वारा चीन का पक्ष लेने और उसके उस कथन का समर्थन करने का प्रमाण है जिसमें जापान को फिर से सैन्य खतरा बताया गया है। इस प्रदर्शन ने ताइवान में चिंता पैदा कर दी है कि रूस, चीन के साथ मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर कर रहा है। ताइवान का दावा है कि यह घटनाक्रम ताइवान जलडमरूमध्य में तनाव को और बढ़ा सकता है। रूस के इस कदम को ताइवान की संप्रभुता के प्रति अनादर के रूप में भी देखा जा रहा है। इस मामले पर ताइवान सरकार ने रूस के प्रति अपनी कड़ा विरोध दर्ज कराया है। यह घटनाक्रम रूस और ताइवान के बीच संबंधों में एक नए मोड़ का संकेत देता है।