कार्यवाहक उप प्रधानमंत्री ओआना घेओर्घियु ने 13-15 जून 1990 की खदान श्रमिकों की घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सबसे उल्लेखनीय बात यह थी कि ईमानदार और मेहनती लोगों को यह विश्वास दिलाना कितना आसान था कि प्रदर्शनकारी “देश के दुश्मन” थे। घेओर्घियु के अनुसार, यह एक उत्कृष्ट हेरफेर था, जो सोवियत पाठ्यपुस्तकों के अनुसार पूरी तरह से क्रियान्वित किया गया था। उन्होंने इस घटना को सोवियत शैली के दुष्प्रचार का उदाहरण बताया। उनका कहना है कि सामान्य नागरिकों को आसानी से गुमराह किया गया और विरोध प्रदर्शनों को देश विरोधी गतिविधियों के रूप में चित्रित किया गया। यह टिप्पणी 1990 की इस विवादास्पद घटना के दौरान हुई राजनीतिक माहौल और प्रचार तकनीकों पर प्रकाश डालती है। घेओर्घियु का मानना है कि इस तरह के हेरफेर से ही हिंसा भड़की। यह घटना रोमानिया के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ थी।