बिहार में अवैध वृद्धाश्रमों से जुड़े मामले में, अदालत ने वियोरेल पास्का की गिरफ्तारी अस्वीकार कर दी है। जांच एजेंसी DIICOT ने उन पर पीड़ितों की भर्ती करने का आरोप लगाया था, लेकिन अदालत ने पाया कि ऐसा कोई सबूत नहीं है। इसके विपरीत, अदालत के अनुसार, राज्य संस्थानों ने ही कमजोर लोगों को इन वृद्धाश्रमों में भेजा था। न्यायालय के निर्णय के अनुसार, सार्वजनिक संस्थानों ने लाभार्थियों को आरोपियों द्वारा संचालित स्थानों तक पहुंचने में सुविधा प्रदान की। यह मामला मानव तस्करी और अवैध वृद्धाश्रमों के संचालन से जुड़ा है। इस फैसले ने इस मामले में संस्थागत विफलता पर प्रकाश डाला है। आगे की जांच जारी है।