सर्बियाई दादाजी ने युद्ध के दौरान भविष्यवाणी की थी कि रात्को म्लादिच और उसकी सेना उनके अपराधों के लिए जवाबदेह होंगे। हाल ही में म्लादिच की मृत्यु हो गई, हालाँकि उन्हें दोषी ठहराया गया था, लेकिन वे वृद्धावस्था में जीवन जी पाए। वहीं, उनके पीड़ित कभी बूढ़े नहीं हो सके। यह घटना न्याय मिलने में हो रही देरी और युद्ध अपराधों के पीड़ितों के लिए एक मार्मिक अनुस्मारक है। लेखक के दादाजी की यह बात सत्य साबित हुई कि आखिरकार म्लादिच को अपने कर्मों का फल मिला। यह घटना पीड़ितों के परिवारों के लिए थोड़ी राहत ज़रूर लाएगी, लेकिन यह दुखद है कि न्याय आने में इतना समय लगा। इस घटना से युद्ध अपराधों के प्रति शून्य सहनशीलता की आवश्यकता पर फिर से जोर दिया जाता है।