कई एशियाई और अफ्रीकी सरकारों का कहना है कि रूस धोखे से लोगों की भर्ती कर उन्हें यूक्रेन में मोर्चे पर भेज रहा है। युद्धबंदी शिविरों में पकड़े गए इन सैनिकों की गवाही से पता चलता है कि स्थिति अधिक जटिल है। कुछ लोग स्वेच्छा से लड़ने आए हैं, जबकि अन्य को गलत जानकारी या आर्थिक प्रलोभन देकर भर्ती किया गया है। इन सैनिकों में विभिन्न देशों के नागरिक शामिल हैं, जो रूस के लिए युद्ध में भाग ले रहे हैं। उनकी भर्ती की प्रक्रिया और परिस्थितियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि यह मानवाधिकारों और युद्ध अपराधों से जुड़ा हो सकता है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इन सैनिकों को जबरदस्ती या धोखे से भर्ती किया गया था।