यह लेख रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बदलती विदेश नीति और अफगानिस्तान के प्रति उनके दृष्टिकोण पर चर्चा करता है। इतिहास के पन्नों में सोवियत संघ की अफगानिस्तान से अपमानजनक वापसी एक गहरी चोट की तरह दर्ज है। चार दशक पहले मुजाहिदीन के प्रतिरोध ने सोवियत सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था। लंबे समय तक रूस में इन लड़ाकों के प्रति कड़ा विरोध और घृणा देखी गई। हालांकि, वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने रूस को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर किया है। अब पुतिन उन समूहों के उत्तराधिकारियों के साथ संबंध सुधारने की कोशिश कर रहे हैं जिनसे कभी रूस की दुश्मनी थी। यह बदलाव रूस के रणनीतिक हितों और वैश्विक समीकरणों को देखते हुए किया गया है।
