सार्वजनिक परिवहन के नए पंजीकरणों पर रोक लगने से केंद्र और राज्य सरकारों के बीच मतभेद सामने आए हैं। कई प्रांत इस फैसले के कार्यान्वयन को लेकर असहमत हैं, जबकि परिवहन ऑपरेटरों ने भी इस निलंबन पर सवाल उठाए हैं। वे इस प्रतिबंध के हटने की स्पष्ट समय-सीमा का इंतजार कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने अभी तक इस रोक के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं किया है, जिससे अनिश्चितता का माहौल है। इस फैसले से सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण पर असर पड़ सकता है। राज्य सरकारें चाहती हैं कि केंद्र सरकार जल्द से जल्द इस मामले में स्पष्टता लाए और पंजीकरण प्रक्रिया को बहाल करे। ऑपरेटरों का कहना है कि इससे उनकी व्यावसायिक योजनाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।