स्वास्थ्य सेवा में निजी वित्तपोषण और सेवा प्रदाताओं के बीच हितों का टकराव, गुणवत्तापूर्ण देखभाल की बजाय लागत नियंत्रण पर अधिक जोर देता है। यह मरीजों की भलाई को द्वितीयक बना देता है। जब निजी कंपनियां स्वास्थ्य सेवा प्रदाता भी होती हैं, तो उनका मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना होता है, न कि रोगियों को सर्वोत्तम संभव देखभाल प्रदान करना। इसके परिणामस्वरूप, चिकित्सा निर्णय लागत-प्रभावशीलता से प्रभावित हो सकते हैं, जिससे आवश्यक उपचारों में कटौती या कम गुणवत्ता वाली सेवाएं मिल सकती हैं। इस स्थिति में, मरीजों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को खतरे में डाला जा सकता है। गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए, वित्तपोषण और देखभाल प्रदान करने वालों के बीच स्पष्ट सीमाएं होनी चाहिए। मरीजों को हमेशा प्राथमिकता दी जानी चाहिए, और लागत नियंत्रण को कभी भी देखभाल की गुणवत्ता से ऊपर नहीं रखना चाहिए।