एक समूह ने सरकार से जेल अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन विधेयक को वापस लेने का आग्रह किया है। यह संशोधन जेल कर्मियों को, यदि वे उचित निर्देशों का पालन करते हुए सद्भावपूर्वक कार्य करते हैं, तो किसी भी दायित्व से बचाने का प्रयास करता है। समूह का तर्क है कि यह संशोधन जेल कर्मियों को जवाबदेही से मुक्त कर सकता है और मानवाधिकारों के उल्लंघन को बढ़ावा दे सकता है। उनका मानना है कि यह विधेयक जेल प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही को कमजोर करेगा। समूह ने सरकार से इस मुद्दे पर पुनर्विचार करने और सभी हितधारकों के साथ परामर्श करने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि जेल कर्मियों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन यह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के साथ संतुलित होनी चाहिए। इस संशोधन से जेलों में कथित दुर्व्यवहार की घटनाओं में वृद्धि होने की आशंका है।
