हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए प्रधानमंत्री को गवाही देने से छूट दे दी है। यह मामला 30 मिलियन रिंगिट के कानूनी विवाद से संबंधित है। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री को गवाही के लिए मजबूर करने वाला समन मान्य नहीं होगा। न्यायालय के अनुसार, प्रधानमंत्री इस मामले में एक 'मटेरियल विटनेस' यानी मुख्य गवाह नहीं हैं। इस कारण उनकी उपस्थिति की कानूनी आवश्यकता नहीं समझी गई। यह फैसला प्रधानमंत्री को अदालती कार्यवाही में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से बचाता है। कोर्ट ने मामले के तथ्यों और गवाहों की प्रासंगिकता के आधार पर यह निर्णय लिया है।
