राष्ट्रपति पेट्र पावेल ने नाटो शिखर सम्मेलन को लेकर सरकार के साथ विवाद सुलझाने के लिए पहले ही प्रयास शुरू कर दिए थे। उन्होंने अप्रैल से ही प्रधानमंत्री आंद्रेज बाबिश को दो पत्र भेजे थे, जिसमें शांतिपूर्ण समाधान की गुहार लगाई गई थी। राष्ट्रपति ने बाबिश से नागरिकों और सहयोगियों को यह संदेश देने के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया था कि वे सहमति बना सकते हैं। हालांकि, बाबिश ने इन दोनों पत्रों को अनदेखा कर दिया। विदेश मंत्री पेट्र मैकिंका ने राष्ट्रपति के इस कदम को ‘टकरावपूर्ण’ बताया है, लेकिन राष्ट्रपति कार्यालय का कहना है कि यह सुलह का प्रयास था। बाबिश की प्रतिक्रिया न मिलने के बाद ही राष्ट्रपति ने सरकार के खिलाफ संवैधानिक अदालत में मामला दायर किया। यह घटनाक्रम चेक गणराज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राष्ट्रपति और सरकार के बीच संबंधों को दर्शाता है।
