पोप फ्रांसिस ने फ्रांस की यात्रा के समापन पर, मेट्ज़ से रोम की उड़ान के दौरान एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, चरमपंथी आंदोलनों को 'ईसाई नहीं' बताया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ये आंदोलन ईसाई धर्म का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। यह टिप्पणी फ्रांस में बढ़ते चरम-दक्षिणपंथी प्रभाव के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। पोप ने इस बात पर जोर दिया कि ईसाई धर्म समावेशी और प्रेमपूर्ण है, और चरमपंथी विचारधाराएँ इसके विपरीत हैं। यह बयान धार्मिक और राजनीतिक क्षेत्रों में व्यापक रूप से चर्चा का विषय बना हुआ है। फ्रांस में उनकी गहन यात्रा के बाद यह वक्तव्य आया है, जिसने धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के महत्व पर प्रकाश डाला। पोप की इस कड़ी चेतावनी का उद्देश्य उन ताकतों का विरोध करना है जो विभाजन और नफरत फैलाती हैं।