चुनाव पूर्व सर्वेक्षण, सांख्यिकी पर आधारित होते हैं और केवल संभावनाओं का अनुमान लगाते हैं, निश्चित परिणामों की गारंटी नहीं देते। ये सर्वेक्षण जनसंख्या के एक नमूने पर निर्भर करते हैं, इसलिए इनके नतीजे पूरी आबादी का सटीक प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते। विभिन्न सर्वेक्षणों में भिन्न परिणाम आना सामान्य है, क्योंकि नमूनाकरण विधियाँ और प्रश्न पूछने के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सर्वेक्षणों को केवल एक संदर्भ के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि अंतिम सत्य के रूप में। मतदाताओं के व्यवहार में अप्रत्याशित बदलाव सर्वेक्षणों के अनुमानों को गलत साबित कर सकते हैं। इसलिए, चुनाव परिणामों की भविष्यवाणी करते समय सर्वेक्षणों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहिए। सर्वेक्षणों की सीमाओं को समझना महत्वपूर्ण है।