एक बड़े ड्रग मामले के बाद, जिसमें विभागीय जांच के साथ-साथ तत्काल आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की गई थी, छह महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कोई नियमित मामला दर्ज नहीं किया गया है। इस देरी से सवाल उठ रहे हैं कि निलंबित अधिकारी अभी भी पद पर बने हुए हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए थी। मामले में अब तक की प्रगति की कमी के कारण कई लोगों में निराशा है। अधिकारी के पद पर बने रहने से जांच की निष्पक्षता पर भी संदेह जताया जा रहा है। इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। अधिकारियों ने अभी तक इस देरी का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है।