कॉर्डोबा और मराकेश के दार्शनिक इब्न रुश्द की 900वीं जयंती मनाई जा रही है। इस अवसर पर 14 देशों के 120 कवियों ने उनकी प्रतिभा और प्रभाव को याद करने में भाग लिया, जिसमें उत्तरी अफ्रीकी कवि भी शामिल थे। इस साहित्यिक पहल को ‘काव्यात्मक एंथोलॉजी’ कहा गया है और इसे इब्न रुश्द, जिनका पूरा नाम अबू अल-वलीद मुहम्मद इब्न अहमद इब्न रुश्द है, को श्रद्धांजलि के रूप में तैयार किया गया है। प्रतिभागी अब्दुल अजीज कुकास के अनुसार, यह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक पहल है। यह एंथोलॉजी दुनिया के सबसे प्रमुख शख्सियतों में से एक के रूप में उनकी विरासत का जश्न मनाती है। यह कार्यक्रम इब्न रुश्द के विचारों और योगदान को सम्मानित करने का एक सामूहिक प्रयास है।