वर्तमान में, हर मिनट दस लाख से अधिक पीईटी (PET) प्लास्टिक की बोतलें बनाई जा रही हैं। यह प्लास्टिक अपनी रासायनिक स्थिरता के कारण पर्यावरण के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। वैज्ञानिक पृथ्वी के सबसे दुर्गम क्षेत्रों में भी इसके अवशेष खोज रहे हैं। प्लास्टिक की यह टिकाऊ प्रकृति ही इसका सबसे बड़ा अभिशाप साबित हो रही है। यह प्रदूषण पर्यावरण को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है और इसका समाधान ढूंढना आवश्यक है। प्लास्टिक के कचरे का उचित प्रबंधन और पुनर्चक्रण इस समस्या से निपटने के महत्वपूर्ण उपाय हैं। इस स्थिति को देखते हुए, प्लास्टिक के उपयोग को कम करने की दिशा में तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है।
