दार्शनिक एस. मोलोर-एर्डेने को 2 सितंबर से ‘राष्ट्रीय एकता को कमजोर करने’ के आरोप में हिरासत में लिया गया था। आज, उनके वकीलों के अनुरोध पर, उलानबटार शहर की सीमाओं से बाहर जाने पर प्रतिबंध लगाने और उनकी रिमांड रद्द करने का फैसला जिला आपराधिक और नागरिक मामलों के लिए प्राथमिक न्यायालय द्वारा सुनाया गया है। न्यायालय के फैसले के सारांश को मुख्य न्यायाधीश बी. हाल्यून द्वारा प्रस्तुत किया गया है। अभियोजन पक्ष ने एस. मोलोर-एर्डेने के खिलाफ ‘राष्ट्रीय एकता को कमजोर करने’ के आरोप में आपराधिक मामला दर्ज किया है और उनकी हिरासत का विस्तार करने का अनुरोध किया था, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। हालांकि, आरोपी के वकीलों द्वारा दायर आपत्तियों की समीक्षा के बाद, अदालत ने मामले से संबंधित साक्षों और आरोपी के स्वास्थ्य की स्थिति को ध्यान में रखते हुए, हिरासत के उपाय को बदल दिया। अदालत ने फैसला सुनाया कि एस. मोलोर-एर्डेने को मंगोलियाई सीमा से बाहर जाने पर प्रतिबंध लगाया जाएगा, उन्हें उलानबटार शहर की सीमाओं से बाहर जाने से रोका जाएगा, और मामले में शामिल व्यक्तियों के साथ मिलने, संवाद करने या संपर्क स्थापित करने से प्रतिबंधित किया जाएगा।