पोर्टो में आयोजित नए साहित्यिक उत्सव के उद्घाटन समारोह में जर्मन-कोरियाई दार्शनिक ब्योंग-चुल हान की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में एक घंटे से अधिक की देरी हुई, जिससे दर्शकों में असंतोष फैल गया। इसके अतिरिक्त, अनुवाद में भी कुछ समस्याएं आईं, जिसके कारण दार्शनिक के विचारों को समझने में कठिनाई हुई। आयोजकों ने देरी और अनुवाद संबंधी दिक्कतों के लिए खेद व्यक्त किया है। इस घटना ने उत्सव के शुरुआती आयोजन पर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। हालांकि, हान के दर्शन में रुचि रखने वाले लोगों ने कार्यक्रम में उत्साह दिखाया। भविष्य में ऐसे आयोजनों में बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
