छह साल पहले, 3 जुलाई को विवादास्पद आतंकवाद विरोधी कानून लागू किया गया था। इस कानून को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, क्योंकि आरोप है कि इसका दुरुपयोग निर्दोष लोगों के खिलाफ किया जा रहा है। पिछले छह वर्षों में, इस कानून के तहत 256 लोगों को कथित रूप से पीड़ित किया गया है। मानवाधिकार संगठनों और विपक्षी दलों ने इस कानून को निरस्त करने की मांग की है, उनका कहना है कि यह कानून नागरिकों की स्वतंत्रता और अधिकारों का उल्लंघन करता है। सरकार पर कानून की समीक्षा करने और पीड़ितों को न्याय दिलाने का दबाव बढ़ रहा है। यह कानून अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उचित प्रक्रिया के सिद्धांतों पर भी सवाल उठाता है। निरस्त करने की मांग जोर पकड़ रही है क्योंकि आलोचकों का तर्क है कि कानून का दुरुपयोग असंतोष को दबाने के लिए किया जा रहा है।