दस मुहर्रम के दिन फिरौन का विनाश हुआ था। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, यह वही दिन था जब फिरौन और उसकी सेना लाल सागर में डूब गई थी। फिरौन, जिसने स्वयं को ईश्वर घोषित कर दिया था, का यह अंत एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और धार्मिक घटना मानी जाती है। यह घटना ‘आशूरा’ के नाम से भी प्रसिद्ध है और इसे शोक और स्मरण के दिन के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन अल्लाह ने मूसा (मोज़ेस) और उनके अनुयायियों को फिरौन की सेना से बचाया था। इस घटना से फिरौन के अत्याचार और अहंकार का अंत हुआ। यह कहानी शक्ति के दुरुपयोग और ईश्वर के प्रति अवज्ञा के परिणामों की चेतावनी देती है।