लोक डिफेंडर (ombudsman) ने संवैधानिक न्यायालय के उस फैसले को “कानून के अनुसार पूर्ण” माना है जिसमें व्लादिमीर सेरॉन के खिलाफ निवारक कारावास (preventive detention) के आदेश को रद्द कर दिया गया। यह फैसला सेरॉन के मामले में महत्वपूर्ण है, जहाँ उन पर राजनीतिक उत्पीड़न का आरोप लगाया गया था। गुटिएरेज़ का कथन है कि यदि किसी को केवल सताने के लिए जेल की सजा दी जाती है, तो भागना उचित है, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है। यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया में निष्पक्षता और कानून के शासन के महत्व पर जोर देता है। आलोचकों का कहना है कि यह फैसला राजनीतिक रूप से प्रेरित है, जबकि समर्थकों का तर्क है कि यह कानूनी अधिकारों की रक्षा करता है। इस मामले ने पेरू की राजनीति में गहन बहस छेड़ दी है। फैसले से कानूनी विशेषज्ञों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के बीच भी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।