पेरू में वाल्डमार सेरॉन द्वारा प्रस्तावित कानून के तहत, कलाकरों के लिए एक पेशेवर कॉलेज स्थापित किया गया है। यह कानून उन कलाकारों को मान्यता देता है जिनके पास अकादमिक डिग्री है, लेकिन इसने हजारों स्व-शिक्षित कलाकारों, संगीतकारों, लोक हास्य कलाकारों और पारंपरिक कलाकारों के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चिंता यह है कि अनुभव और कार्य के बजाय, अब सरकारी अवसरों तक पहुँच के लिए डिप्लोमा और कॉलेज सदस्यता आवश्यक हो सकती है। आलोचकों का कहना है कि यह कानून उन कलाकारों को हाशिए पर धकेल सकता है जिनके पास औपचारिक शिक्षा नहीं है, लेकिन वर्षों का अनुभव है। इस नए नियम से कला जगत में प्रतिभा और योग्यता के मूल्यांकन के तरीकों पर बहस छिड़ गई है। यह कानून पेरू की कला और संस्कृति पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है। फिलहाल, इस कानून के कार्यान्वयन और इसके संभावित परिणामों पर सभी की निगाहें टिकी हैं।