पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने सिंध उच्च न्यायालय के एक फैसले को बरकरार रखा है, जिसके तहत Bait-ul-Mal को दो हिंदू लड़कियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की अनुमति दी गई थी। यह मामला सिंध प्रांत में रहने वाली दो हिंदू बहनों की शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करने से संबंधित था। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि Bait-ul-Mal, जो इस्लामी सिद्धांतों के तहत जरूरतमंदों को सहायता प्रदान करता है, गैर-मुसलमानों को सहायता नहीं दे सकता है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि Bait-ul-Mal का उद्देश्य सभी जरूरतमंदों की सहायता करना है, चाहे उनका धर्म कोई भी हो। न्यायालय ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के संविधान के अनुसार, सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समान माना जाता है। इस फैसले से सिंध प्रांत के हिंदू समुदाय में खुशी की लहर दौड़ गई है। यह फैसला धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने में एक महत्वपूर्ण कदम है।