केंद्र सरकार ने हाल ही में प्रस्तुत बजट में कृषि क्षेत्र को पर्याप्त महत्व नहीं दिया है। बजट आवंटन में कृषि और संबंधित क्षेत्रों को कम प्राथमिकता दी गई है, जिससे किसानों और विशेषज्ञों में निराशा है। उर्वरकों पर सब्सिडी में कटौती और सिंचाई परियोजनाओं के लिए अपर्याप्त धन का आवंटन चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। बजट में कृषि उत्पादों के भंडारण और परिवहन के लिए बुनियादी ढांचे के विकास पर भी ध्यान नहीं दिया गया है। सरकार का दावा है कि अन्य क्षेत्रों में निवेश से अप्रत्यक्ष रूप से कृषि को लाभ होगा, लेकिन किसान इस तर्क से सहमत नहीं हैं। इस बजट से कृषि विकास दर में गिरावट आने की आशंका जताई जा रही है।