नार्वे की संसद ने पूर्व न्याय एवं आपातकालीन तैयारी मंत्री एमिली एंगर मेहल और स्टोरे सरकार के कामकाज पर तीखी आलोचना की है। यह आलोचना उनके द्वारा संभाले गए एक विशेष मामले के प्रबंधन से संबंधित है, जिसके कारण कई सवाल खड़े हुए हैं। संसद की रिपोर्ट में मेहल पर उचित प्रक्रिया का पालन न करने और महत्वपूर्ण जानकारी को छिपाने का आरोप लगाया गया है। सरकार पर भी इस मामले में पर्याप्त निगरानी रखने में विफल रहने का आरोप है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की भी बात कही है। इस आलोचना के बाद मेहल ने अपनी भूमिका के लिए जिम्मेदारी स्वीकार की है, लेकिन आरोपों से इनकार किया है। इस मामले ने नार्वे की राजनीति में एक बड़ा विवाद पैदा कर दिया है और सरकार पर जवाबदेही तय करने का दबाव बढ़ गया है।