ऑस्ट्रियाई लेखिका और नोबेल पुरस्कार विजेता एल्फ्राइड येलिंक ने फ़लस्तीनी राज्य की निरंतर चर्चा को, बस्तियों और भूमि अधिग्रहण के आलोक में, एक “अघोषित झूठ” बताया है। उनका मानना है कि जमीनी हकीकत बदलने के साथ दो-राष्ट्र समाधान की व्यवहार्यता कम हो रही है। येलिंक ने यूरोपीय संघ से भूमि अधिग्रहण और हिंसा के खिलाफ सख्त प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया है। लेखिका के अनुसार, फ़लस्तीनी राज्य का विचार बिना किसी वास्तविक भूमि के मात्र एक भ्रम है। उन्होंने इस स्थिति को ‘वादे का देश’ कहकर वर्णित किया है, जहाँ वादा तो किया गया है, लेकिन वास्तविकता उससे कोसों दूर है। उनका बयान इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष पर एक तीखी टिप्पणी है, जो समाधान की संभावनाओं पर सवाल उठाती है। यह बयान हस्प्रैस, एक मोरक्कन ऑनलाइन समाचार पत्र में प्रकाशित हुआ है।