सर्वोच्च न्यायालय के हालिया प्रकाशित फैसलों के विश्लेषण से पता चला है कि नए मुख्य न्यायाधीश शर्मा अक्सर महत्वपूर्ण बेंच निर्णयों में मुख्य लेखक की बजाय हस्ताक्षरकर्ता रहे हैं। उनका योगदान फैसलों को लिखने के बजाय उन पर सहमति देने तक अधिक सीमित रहा है। यह जानकारी उनके द्वारा दिए गए फैसलों की समीक्षा से सामने आई है। इससे यह संकेत मिलता है कि वे अक्सर अन्य न्यायाधीशों द्वारा तैयार किए गए मसौदों पर अपनी सहमति दे रहे थे। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह असामान्य नहीं है, लेकिन मुख्य न्यायाधीश की भूमिका को देखते हुए ध्यान देने योग्य है। इस प्रवृत्ति का भविष्य के फैसलों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह अभी देखना बाकी है। न्यायालय ने इस विषय पर अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।