अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते से इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक छवि को बड़ा झटका लग सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू ने दशकों से खुद को ऐसे नेता के रूप में स्थापित किया है जो वाशिंगटन को ईरान के मुद्दे पर अपनी बात मनवा सकता है। उन्होंने लगातार अमेरिकी दबाव के माध्यम से ईरान को नियंत्रित करने की वकालत की और रिपब्लिकन समर्थन जुटाया। एक समय पर उन्हें ‘अमेरिकी कान में फुसफुसाने वाला’ कहा जाता था, क्योंकि वे अमेरिकी नीति को इजराइल के हितों के अनुरूप ढालने में सक्षम माने जाते थे। लेकिन अब, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए हुए अस्थायी समझौते से नेतन्याहू की यह रणनीति विफल होती दिख रही है। वे अब अमेरिकी नीति को प्रभावित करने के बजाय उसे स्वीकार करने के लिए मजबूर हैं, जबकि घरेलू स्तर पर उन्हें विरोध का सामना करना पड़ रहा है, खासकर लेबनान के संदर्भ में। इस समझौते से नेतन्याहू की राजनीतिक विरासत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।