राज्य के तेल निगम ने एलपीजी खरीदने वालों के लिए नागरिकता प्रमाण पत्र या राष्ट्रीय पहचान पत्र अनिवार्य करने के फैसले को लेकर आलोचना का सामना किया है। निगम का कहना है कि यह कदम एलपीजी की कमी के दौरान जमाखोरी को रोकने के लिए एक प्रारंभिक परीक्षण है। यह फैसला उन ग्राहकों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है जिनके पास ये दस्तावेज आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। आलोचकों का तर्क है कि यह कदम अनावश्यक है और गरीबों को एलपीजी प्राप्त करने से वंचित कर सकता है। निगम ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक अस्थायी उपाय है और स्थिति सामान्य होने पर इसे वापस ले लिया जाएगा। फिलहाल, इस फैसले से उपभोक्ताओं में भ्रम और असंतोष का माहौल है। सरकार इस मामले में हस्तक्षेप कर सकती है।