नेपोलियन बोनापार्ट की कब्र पर लंबे समय तक कोई शिलालेख नहीं था। इसका मुख्य कारण यह था कि उनके नाम को लेकर फ्रांसीसी और अंग्रेज किसी एक सहमति पर नहीं पहुंच पाए थे। इस राजनयिक गतिरोध के कारण उनकी कब्र बिना किसी नाम के रही। हालांकि, 19 साल बाद उन्हें वापस लाया गया और पेरिस में फिर से दफनाया गया। अब उनकी कब्र पर उचित शिलालेख और एक भव्य स्मारक मौजूद है। वर्तमान में यह स्थान एक प्रमुख पर्यटन केंद्र बन गया है। हर साल लगभग पंद्रह लाख पर्यटक इस ऐतिहासिक स्थल को देखने आते हैं।