हाल ही में, एक मुस्लिम व्यवसायी चर्च में अपनी मशीनों की सर्विसिंग करते हुए मिला। उसने बताया कि उसने अपना बड़ा व्यवसाय बंद कर दिया है, जो शहर के केंद्र में स्थित था। यह घटना 'भगवान और देश के नाम पर' जैसे नारों पर सवाल उठाती है, खासकर तब जब व्यवसायी अपनी आजीविका खो रहे हैं। यह व्यवसायी कई सालों से मशीनों की बिक्री का काम कर रहा था, लेकिन अब उसे व्यवसाय बंद करना पड़ा। यह कहानी आर्थिक कठिनाई और धार्मिक अल्पसंख्यकों के सामने आने वाली चुनौतियों को दर्शाती है। यह एक गंभीर सवाल है कि क्या देशभक्ति और धार्मिक भावनाएं व्यवसायों को आर्थिक मंदी से बचा सकती हैं। यह घटना देश में व्यवसाय करने वाले अल्पसंख्यकों की स्थिति पर भी प्रकाश डालती है।